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मुक्तेश्वर |

नैनीताल से चालीस किमी की दूरी पर स्थित है अत्यंत रमड़ीक, मनोहारी एवं प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर मुक्तेश्वर।  मुक्तेश्वर जैसा की नाम से ही विदित है प्रसिद्ध है सदियों पुराने भगवान शिव के प्राचीन मंदिर " मुक्तेश्वर  धाम " के लिए और इसी से इसका यह नाम पड़ा। नैनीताल जहाँ एक और वर्ष भर पर्यटकों से भरा रहता है वहीँ मुक्तेश्वर एहसास कराता है शांति एवं सुकून का।

समुद्र तल से २२८० मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल जहाँ एक ओर घिरा हुआ है  बर्फ से आच्छादित पर्वत श्रेणियों से वहीँ दूसरी ओर हैं दूर दूर तक फैली हुई वादियां। यहाँ से आप भारतीय हिमालय की कुछ सबसे ऊँची एवं पवित्र पर्वत चोटियों का अदभुत दृश्य देख सकते हैं।

हिमाच्छादित त्रिशूल, नंदा देवी, नंदकोट, ओम पर्वत एवं पंचाचूली शिखरों के यहाँ भव्य दर्शन होते हैं तथा साथ ही होता है एक अदभुत आध्यात्मिक अनुभव। सैकड़ों किमी में फैली हुई यह चित्रमाला एक अलौकिक परिदृश्य प्रस्तुत करती है तथा मन को अनुभव कराती है एक विचित्र सी शांति एवं संपूर्णता।  घण्टों तक इस अनुपम दृश्य का पान करने के उपरान्त भी आँखों को कहीं और टिकाना अत्यंत कठिन जान पड़ता है।

तत्पश्चात अत्यंत प्रयास करने के उपरांत ही मैं अपने नेत्रों को वहां से हटा सका।  मुक्तेश्वर का एक अन्य आकर्षण है चौली की जाली। लोक कथाओं के अनुसार बहुत पहले कैलाश मानसरोवर यात्रा मैं जाने वाला श्रद्धालुओं का एक जत्था यहाँ आकर  आगे का मार्ग न मिलने के कारन रुक गया तब उन्होंने  महादेव से प्रार्थना की जिससे उन्हें  आगे का मार्ग मिला। चौली की जाली का अर्थ है, " चट्टान में छिद्र " एवं यहाँ से दूर दूर तक फैली हुई वादियों और चोटियों के विहंगम दर्शन होते हैं। एडवेंचर के शौक़ीन लोग यहाँ रॉक क्लाइम्बिंग एवं रैपलिंग में भी हाथ आजमा सकते हैं। 

इसी से लगा हुआ है मुक्तेश्वर धाम मंदिर जहाँ कुछ सीढियाँ चढ़के पंहुचा जा सकता  है। यह एक अत्यंत प्राचीन मंदिर है तथा यहाँ का वातावरण अत्यंत पवित्र एवं आध्यात्मिक है। मंदिर में ही यहाँ के पुजारी स्वामी जी का आश्रम है जो की बंगाल से हैं और कई वर्ष पहले आकर इस स्थान पर बस गए थे। स्वामी जी अत्यंत शांत चित्त एवं आध्यात्मिकता से भरपूर प्राणी हैं। आप जीवन के किसी भी पहलू पर उनसे बात कर सकते हैं एवं अनेक अनुत्तरित प्रश्नों के उत्तर आप  यहाँ पा सकते हैं। यह स्थान ध्यान लगाने के लिए अत्यंत उत्तम है एवं महादेव का प्राचीन मंदिर चित्त को एक अद्भुत शांति एवं स्थिरता प्रदान करता है। 

वास्तव में यह एक दिव्य  स्थान है जहाँ की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करना संभव नही  है। लोकप्रिय हिल स्टेशंस की भीड़ भाड़ से दूर यह एक शांत एवं मनोरम स्थल है जहाँ से वापस आना सहज ही मुश्किल है। हिमालय के दूर दूर तक फैले ये शिखर प्रत्यक्ष ईश्वर की ही अभिव्यक्ति हैं एवं प्रकृति की विराटता का एहसास कराते हैं जिनके आगे जीवन का अस्तित्व गौड़ प्रतीत होता है एवं हमें अपने समान  ही ऊंचा उठने के लिए प्रेरित करते हैं।

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मुक्तेश्वर में आप हिमालय के दिव्य अनुपम दृश्यों का पान कर सकते हैं और एक पैनोरमिक व्यू का आनंद ले सकते हैं, हिमालय की पवित्र चोटियों जैसे त्रिशूल, नंदा देवी, नंदा घुंटी, नंदकोट, पंचाचूली इत्यादि के भी यहाँ अद्भुत दर्शन होते हैं | प्राचीन शिव मंदिर तो है ही |
मुक्तेश्वर में देखने के लिए चौली की जाली, हिमालय इत्यादि स्थल तो हैं ही साथ ही रॉक क्लाइम्बिंग इत्यादि का भी अनुभव प्राप्त किया जा सकता है और प्राचीन शिव मंदिर में दर्शन कर आध्यात्मिक लाभ अर्जित का मन की शांति भी प्राप्त होती है |
Himalayan views and Chauli Ki Jali
चौली की जाली चट्टान में छिद्र के लिए प्रसिद्ध है, मुक्तेश्वर में देखने का एक प्रिय स्थल है |
                 कब जाएँ ...
   शिशिर माँह अक्टूबर से ग्रीष्म काल मई तक 
​    तापमान : शीत - 5 से 15; ग्रीष्म 12 - 24
I am Sirkha Cow....

lost..in Himalayas....

 

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